Jumat, 04 Februari 2011

Kishikandha Kand-किषिकन्धा काण्ड

Kishikandha Kand-किषिकन्धा काण्ड
  1. मंगलाचरण
  2. श्री रामजी से हनुमानजी का मिलना और श्री राम-सुग्रीव की मित्रता
  3. सुग्रीव का दुःख सुनाना, बालि वध की प्रतिज्ञा, श्री रामजी का मित्र लक्षण वर्णन
  4. सुग्रीव का वैराग्य
  5. बालि-सुग्रीव युद्ध, बालि उद्धार, तारा का विलाप
  6. तारा को श्री रामजी द्वारा उपदेश और सुग्रीव का राज्याभिषेक तथा अंगद को युवराज पद
  7. वर्षा ऋतु वर्णन
  8. शरद ऋतु वर्णन
  9. श्री राम की सुग्रीव पर नाराजी, लक्ष्मणजी का कोप
  10. सुग्रीव-राम संवाद और सीताजी की खोज के लिए बंदरों का प्रस्थान
  11. गुफा में तपस्विनी के दर्शन, वानरों का समुद्र तट पर आना, सम्पाती से भेंट और बातचीत
  12. समुद्र लाँघने का परामर्श, जाम्बवन्त का हनुमान्जी को बल याद दिलाकर उत्साहित करना, श्री राम-गुण का माहात्म्य 

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